30 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र
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शाहिद कपूर का मानना है कि अच्छा काम सफलता की गारंटी नहीं होती है।
बॉलीवुड में सफलता की चमक अक्सर संघर्ष की लंबी छाया को छुपा देती है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो न सिर्फ प्रेरित करती हैं बल्कि यह भी सिखाती हैं कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल मिल ही जाती है। अभिनेता शाहिद कपूर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा सफर जिसमें बचपन का अकेलापन, करियर की अनिश्चितता और लगातार रिजेक्शन मिले।
शाहिद ने फिल्मों में पहले बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया। ऑडिशन की लाइन में घंटों खड़े रहते थे। उन्हे यह कहकर रिजेक्ट कर दिया जाता था कि उनका लुक हीरो मटेरियल नहीं। यहां तक कि शाहिद के पास स्ट्रगल के दिनों में अच्छे कपड़े खरीदने के पैसे तक नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट के बल पर इंडस्ट्री में न सिर्फ अपनी अलग जगह बनाई, बल्कि आज अपनी शर्तों पर काम करते हैं।
आज की सक्सेस स्टोरी में जानेंगे शाहिद कपूर के करियर और निजी जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ और खास बातें..
शाहिद 3 साल के थे, तभी उनके पेरेंट्स के बीच तलाक हो गया था।
फिल्मी परिवार, लेकिन आसान नहीं बचपन
शाहिद कपूर का जन्म 25 फरवरी 1981 को नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता पंकज कपूर हिंदी सिनेमा और थिएटर का जाना-माना नाम हैं, जबकि मां नीलिमा अजीम एक संवेदनशील अभिनेत्री और प्रशिक्षित नृत्यांगना रही हैं, लेकिन शाहिद का बचपन किसी फिल्मी कहानी की तरह आसान नहीं था।
तीन साल की उम्र में टूटा परिवार, वक्त से पहले आई मेच्योरिटी
जब वह महज तीन साल के थे, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इसने उनके जीवन को शुरुआती दौर में ही गंभीर बना दिया। शाहिद अपनी मां के साथ किराये के घर में रहने लगे। सीमित साधन, भावनात्मक अकेलापन और एक अस्थिर माहौल ने शाहिद को वक्त से पहले ही मेच्योर कर दिया।
बाद में नीलिमा आजमी ने अभिनेता राजेश खट्टर से शादी की, लेकिन शाहिद का बचपन ज्यादातर संघर्ष में ही बीता।
पढ़ाई-लिखाई और कला की ओर झुकाव
शाहिद कपूर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजहंस विद्यालय, मुंबई से की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में दाखिला लिया। हालांकि पढ़ाई के साथ-साथ उनका मन हमेशा मंच और कैमरे की ओर भागता रहा। अभिनय और नृत्य उनके लिए शौक नहीं, बल्कि खुद को व्यक्त करने का माध्यम बन चुके थे। इसी दौरान उन्होंने देश के मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक डावर के डांस इंस्टीट्यूट से डांस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली। यही फैसला आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया
शाहिद फिल्म ‘दिल तो पागल है’ और ‘ताल’ में बैकग्राउंड डांसर थे। बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करते हुए वे एड फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज में नजर आए, लेकिन उससे मिलने वाली फीस बहुत कम थी। उसी पैसे से घर का खर्च चलाना और ऑडिशन के लिए मुंबई में टिके रहना सबसे बड़ी चुनौती थी।
दोस्तों से कपड़े उधार लेते थे
शाहिद जब ऑडिशन के दौर से गुजर रहे थे, तब ब्रांडेड या ढंग के कपड़े खरीदना उनके लिए मुमकिन नहीं था। कई बार वह दोस्तों से कपड़े उधार लेकर ऑडिशन देने जाते थे। कुछ ऑडिशन में उन्हें सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया गया, क्योंकि उनका लुक हीरो के जैसा नहीं लग रहा था।
ऑडिशन की लाइन में घंटों खड़े रहते थे
कई बार शाहिद को ऑडिशन के लिए घंटों प्रोडक्शन ऑफिस के बाहर इंतजार करना पड़ता था। कई बार तो उन्हें अंदर तक नहीं बुलाया जाता था। वह बताते हैं कि कई बार दिन भर घूमने के बाद भी एक भी ऑडिशन नहीं मिल पाता था।
पिता पंकज कपूर का नाम भी काम नहीं आया
लोगों को लगता है कि स्टार किड होने से शाहिद को आसानी हुई होगी, लेकिन हकीकत इसके उलट थी। शाहिद कहते हैं कि उन्होंने कभी अपने पिता पंकज कपूर का सहारा नहीं लिया। इंडस्ट्री में उन्हें अपनी पहचान खुद बनानी थी, इसलिए वह जानबूझकर अलग रास्ता चुनते रहे।
असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया
शाहिद कपूर ने साल 1998 में जीटीवी के सीरियल ‘Mohandas B.A.L.L.B.’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था। इस शो को उनके पिता पंकज कपूर ने खुद ही प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया था। शो में पंकज कपूर लीड रोल में भी थे। शाहिद के करियर का यह वो दौर था जब वे एक्टिंग में आने से पहले कैमरे के पीछे काम करके इंडस्ट्री को समझ रहे थे।
आत्मविश्वास टूटने की कगार पर था
शाहिद ने जब एक्टिंग के लिए कोशिश करनी शुरू की तो लगातार रिजेक्शन के चलते कई बार उनका आत्मविश्वास भी डगमगा गया। वह मानते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सोचा कि शायद वह फिल्मों के लिए बने ही नहीं हैं, लेकिन डांस और एक्टिंग के प्रति जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया।
म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों में दिखे
पेप्सी के एक एड में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी और काजोल के साथ शाहिद कपूर भी नजर आए थे। इसके अलावा कुछ और छोटे-मोटे ब्रांड के एड्स और फैशन शो भी वे शूट कर चुके थे। इन एड में वो ज्यादा बोलते नहीं थे, लेकिन उनका फेस और एनर्जी नोटिस होने लगी थी।
म्यूजिक वीडियो ‘आंखों में तेरा ही चेहरा’ से शाहिद कपूर को पहली बार पहचान मिली थी। इसमें उनके साथ हृषिता भट्ट थीं। हालांकि इसके बाद भी शाहिद ने कुछ और म्यूजिक वीडियो में काम किया।
‘इश्क विश्क’ से बदली किस्मत
कई सालों के संघर्ष के बाद जब उन्हें ‘इश्क विश्क’ मिली, तो यह रोल भी आसानी से नहीं मिला। लंबा ऑडिशन प्रोसेस, लुक टेस्ट और स्क्रीन टेस्ट के बाद उन्हें यह फिल्म मिली, जिसने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
डायरेक्टर केन घोष ने शाहिद को एड्स और म्यूजिक वीडियो में नोटिस किया और फ्रेश, चॉकलेटी-बॉय इमेज देखकर ‘इश्क विश्क’ के लिए चुन लिया। इस फिल्म को टिप्स के रमेश तौरानी ने प्रोड्यूस किया और यह शाहिद के लिए ड्रीम लॉन्च साबित हुई। हालांकि इस फिल्म में ब्रेक मिलना शाहिद के लिए आसान नहीं था।
शाहिद कहते हैं- ‘कुछ लोग बीएमडब्ल्यू में संघर्ष करते हैं, वे देश के टॉप दो-तीन डायरेक्टर्स के साथ काम करके अपना करियर शुरू करते हैं। मैं 250 ऑडिशन देने के बाद आया था।’
कई राउंड के ऑडिशन के बाद मिला रोल
इंडस्ट्री में शाहिद को पहले एक डांसर के तौर पर ही देखा जाता था। इस इमेज से उनके लिए बाहर निकलना बहुत मुश्किल था। कई लोग मानते थे कि शाहिद में हीरो मटेरियल नहीं है क्योंकि उस दौर में लंबे-चौड़े स्टार्स का ट्रेंड था। ‘इश्क विश्क’ के लिए शाहिद को कई राउंड के ऑडिशन देने पड़े।
उन्हें बार-बार सीन परफॉर्म करने पड़े। शाहिद का सॉफ्ट, बॉय-नेक्स्ट-डोर लुक कुछ प्रोड्यूसर्स को ज्यादा भोला लगता था। डर था कि कॉलेज रोमांस में वे असरदार लगेंगे या नहीं। उस समय उनकी बतौर लीड एक भी फिल्म रिलीज नहीं हुई थी, इसलिए मेकर्स को कॉमर्शियल रिस्क लग रहा था।
‘इश्क विश्क’ 9 मई 2003 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में शाहिद के अपोजिट अमृता राव थीं।
लुक और बॉडी पर काफी मेहनत करनी पड़ी
फिल्म ‘इश्क विश्क’ में शाहिद कपूर ने एक कॉलेज स्टूडेंट राजीव का किरदार निभाया था। रोल मिलने से पहले उन्हें फिटनेस, बॉडी और लुक पर काफी मेहनत करनी पड़ी ताकि वे फ्रेश, लेकिन कॉन्फिडेंट लीड लगें।आखिरकार केन घोष को शाहिद की मेहनत, डांस, एक्सप्रेशन और ईमानदारी पसंद आई और वही फैसला सही साबित हुआ।
हिट फिल्म के बाद भी स्ट्रगल खत्म नहीं हुआ
‘इश्क विश्क’ शाहिद के लिए सिर्फ डेब्यू नहीं थी, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर था। फिल्म युवाओं के बीच सुपरहिट साबित हुई। शाहिद को फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड मिला। इस जीत ने उन्हें उम्मीद दी, लेकिन संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ था।
लगातार 6 फिल्में फ्लॉप हुईं
‘इश्क विश्क’ की सफलता के बाद उम्मीद की जा रही थी कि शाहिद स्टार बन जाएंगे, लेकिन हकीकत इससे अलग थी। इस फिल्म के बाद ’फिदा’, ‘दिल मांगे मोर’, ‘दीवाने हुए पागल’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’, ‘शिखर’ और ‘36 चाइना टाउन’ जैसी लगातार 6 फिल्में फ्लॉप हुईं।
एक्टिंग छोड़ने का मन बनाया
‘इश्क विश्क’ की सक्सेस के बाद जब शाहिद कपूर की 6 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाईं तो लोग उन्हें वन-फिल्म वंडर” मानने लगे। इस टैग से शाहिद का आत्मविश्वास बुरी तरह टूट गया। उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था।
तभी मिला राजश्री फिल्म्स का सहारा
2006 में सूरज बड़जात्या ने शाहिद कपूर को ‘विवाह’ के लिए कास्ट किया। यह फैसला खुद शाहिद के लिए भी चौंकाने वाला था, क्योंकि तब उनका करियर लगभग डूब चुका था। ‘विवाह’ में प्रेम का किरदार शाहिद कपूर के लिए लाइफलाइन साबित हुआ। सादगी भरा किरदार, पारिवारिक फिल्म और मजबूत कहानी ने दर्शकों से सीधा कनेक्शन बना लिया।
‘विवाह’ शाहिद के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट बनी तो वहीं, ‘जब वी मेट’ से स्टारडम मिला
‘विवाह’ बनी टर्निंग पॉइंट
‘इश्क विश्क’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’ और ‘शिखर’ के बाद शाहिद कपूर और अमृता राव की जोड़ी चौथी बार फिल्म ‘विवाह’ में नजर आई। दोनों को फिल्म में खूब पसंद किया गया। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और शाहिद कपूर की छवि एक भरोसेमंद, पारिवारिक हीरो की बन गई। इसी फिल्म के बाद उन्हें इंडस्ट्री में दोबारा गंभीरता से लिया जाने लगा।
‘जब वी मेट’ ने स्टारडम की नई ऊंचाई दी
इसके बाद ‘जब वी मेट जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टारडम की नई ऊंचाई दी। ‘जब वी मेट’ में आदित्य कश्यप का किरदार उनके करियर का माइलस्टोन साबित हुआ। एक इंट्रोवर्ट, टूटे हुए, लेकिन बेहद रियल कैरेक्टर को जिस गहराई से उन्होंने निभाया, उसने साबित कर दिया कि शाहिद सिर्फ चॉकलेट बॉय नहीं, बल्कि एक गंभीर और टैलेंटेड अभिनेता हैं।
सेफ इमेज से बाहर निकलकर रिस्क लेना शुरू किया
‘विवाह’ और ‘जब वी मेट’ के बाद शाहिद ने सेफ इमेज से बाहर निकलकर रिस्क लेना शुरू किया। ‘कमीने’ में डार्क और रफ किरदार निभाकर उन्होंने क्रिटिक्स को चौंका दिया। ‘हैदर’ में उनकी इंटेंस परफॉर्मेंस को करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है और इसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला।
‘उड़ता पंजाब’, ‘पद्मावत’ और ‘कबीर सिंह’ जैसी फिल्मों ने साबित किया कि शाहिद हर तरह के किरदार में खुद को ढाल सकते हैं। जल्द ही शाहिद कपूर फिल्म ‘ओ रोमियो’ में एक अलग अवतार में नजर आने वाले हैं।
ओ रोमियो से पहले विशाल भारद्वाज के साथ शाहिद कपूर कमीने, हैदर और रंगून फिल्म में काम कर चुके हैं।
शाहिद कपूर कहते हैं- विशाल भारद्वाज सर के साथ यह मेरी चौथी फिल्म है और इस बार हमारी कोशिश यही थी कि इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए। इस फिल्म पर करीब एक साल मेहनत की है।
मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं। 22-23 साल हो गए हैं। कुछ फिल्में चलीं, कुछ नहीं चलीं, लेकिन लोगों का प्यार बना रहा। इसके लिए दिल से आभार महसूस करता हूं। जब भी मौका मिलता है, कोशिश करता हूं कि उस प्यार का सम्मान कर सकूं।
क्वालिटी और सक्सेस का सीधा संबंध नहीं
मुझे हमेशा लगता है कि क्वालिटी और सक्सेस हमेशा एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़ी हुई नहीं होतीं। आप क्वालिटी काम करके भी अनसक्सेसफुल हो सकते हैं और कई बार बिना क्वालिटी के काम से भी सक्सेस मिल जाती है। इसलिए इन दोनों के बीच डायरेक्ट पैरेलल ढूंढने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
अच्छा काम अपने लिए किया जाता है
बचपन से हमें यही सिखाया जाता है कि अगर हम अच्छा काम करेंगे तो हमें बहुत सफलता मिलेगी, लेकिन यह जरूरी नहीं है। अच्छा काम आप अपने लिए करते हैं, अपने मानदंड खुद तय करते हैं, किसी और के लिए नहीं। अगर आपने ईमानदारी से अच्छा काम किया है, तो उसका सुकून आपको महसूस होना चाहिए।
असफलता और सफलता दोनों में सीख मिलती है
हमें अक्सर लगता है कि हम सफलता हासिल करते हैं, जबकि सच यह है कि सफलता हमें दी जाती है। कई लोगों को यह आसानी से मिल जाती है और कई को मेहनत के बाद। असफलता जीवन सिखाती है और सफलता एक नेमत होती है, जिसके लिए आभार व्यक्त करना चाहिए।
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