Shahid Kapoor: Romance is Lifes Most Beautiful Thing

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40 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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वैलेंटाइन डे पर रिलीज हो रही शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फिल्म ‘ओ रोमियो’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि गहराई, इमोशन और जटिल किरदारों की दुनिया है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी ने विशाल भारद्वाज के साथ काम करने का अनुभव साझा किया।

तृप्ति ने बताया कि फिल्म में अफ्शा जैसे इंटर्नल किरदार को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था। शाहिद ने अपने अभिनय के नजरिए, रोमांस की परिभाषा और ‘कबीर सिंह’ व ‘एनिमल पार्क’ को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी बेबाकी से बात की, वहीं तृप्ति ने को-एक्टर के तौर पर शाहिद से मिली सीख और अपने सफर की खूबसूरत झलक साझा की। पेश है बातचीत के कुछ और खास अंश..

सवाल:’ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट जब पहली बार सुनी, तो उस वक्त आपके मन में क्या चल रहा था और आपको इस फिल्म के बारे में किसने बताया?

जवाब/तृप्ति डिमरी: मुझे विशाल सर का कॉल आया था और मैं उनसे मिलने ऑफिस गई थी। मैं पहले से ही बहुत एक्साइटेड थी क्योंकि मैं हमेशा से उनके साथ काम करना चाहती थी। जब उन्होंने कहानी सुनाई, तो मुझे तुरंत लगा कि यह कुछ अलग है।

कहानी से भी जुड़ाव हुआ और मेरे किरदार अफ्शा से भी। उस दिन से लेकर आखिरी शूट तक पूरी जर्नी बहुत खूबसूरत रही। कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनमें काम करते हुए आप चाहते हैं कि यह सफर कभी खत्म ही न हो। ‘ओ रोमियो’ मेरे लिए वैसी ही फिल्म है।

सवाल: शाहिद जब आपने ने स्क्रिप्ट सुनी तब आपका पहला रिएक्शन क्या था?

जवाब/शाहिद कपूर: मेरे और विशाल भारद्वाज सर के बीच रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन करीब सात आठ साल बाद हम किसी फिल्म के लिए फिर साथ आए। इसके बावजूद मैं हर स्क्रिप्ट को बिल्कुल न्यूट्रल नजरिए से सुनता हूं। मेरे लिए सबसे जरूरी यह होता है कि कहानी और किरदार मुझसे जुड़ें। अगर वह कनेक्शन नहीं बनता, तो फिल्म करना मुझे ईमानदार नहीं लगता।

जब विशाल सर ने ‘ओ रोमियो’ की स्क्रिप्ट खत्म की, तो मुझे लगा कि इसमें वह गहराई और इमोशनल लेयर है, जो मुझे एक एक्टर के तौर पर एक्साइट करती है। इस बार उन्होंने मास और क्लास दोनों को ध्यान में रखते हुए कहानी कही है।

सवाल: तृप्ति, आपने कई बार कहा है कि शाहिद से आपने बहुत कुछ सीखा। एक को-एक्टर के तौर पर उनकी कौन सी बातें आपको सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं?

जवाब/तृप्ति डिमरी: सिर्फ दो खूबियां गिनाना मुश्किल है। लेकिन सबसे पहले उनकी डिसिप्लिन। वह एक परफेक्शनिस्ट हैं। अगर उन्हें लगता है कि सीन और बेहतर हो सकता है, तो वह तब तक करते रहते हैं जब तक खुद पूरी तरह संतुष्ट न हों। दूसरी बात यह है कि वह हर टेक में कुछ नया लेकर आते हैं। कभी ऐसा नहीं लगता कि वही चीज दोहराई जा रही है।

इससे सामने वाले एक्टर की परफॉर्मेंस भी बेहतर हो जाती है। और सबसे अहम बात यह है कि वह अपने को एक्टर को बहुत सिक्योर और रिलैक्स महसूस कराते हैं। एक एक्टर और एक इंसान, दोनों रूपों में उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।

सवाल: अफ्शा का किरदार निभाते वक्त आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

जवाब/तृप्ति डिमरी: अफ्शा एक बहुत इंटर्नल किरदार है। उसके भीतर दर्द, गुस्सा और उदासी है, लेकिन वह बाहर बहुत कम दिखाई देती है। उस बैलेंस को पकड़ना आसान नहीं था। मेरे एक्टिंग कोच अतुल मोंगिया और विशाल सर के साथ कई लंबे सेशन्स हुए। शुरुआत में मुझे उसे समझने में वक्त लगा, लेकिन जैसे जैसे शूट आगे बढ़ा, वैसे वैसे मैं किरदार के और करीब जाती गई।

मुझे लगता है कि अगर कोई किरदार आपको चैलेंज नहीं करता, तो उसमें मजा नहीं है। एक्टर के तौर पर ग्रोथ वहीं से शुरू होती है।

सवाल: आप दोनों की पहली मुलाकात और शुरुआती कामकाजी रिश्ता कैसा रहा?

जवाब/तृप्ति डिमरी: हम पहली बार रीडिंग के दौरान मिले थे। उस वक्त सबका फोकस सिर्फ स्क्रिप्ट और किरदार पर था। किसी को जज करने का सवाल ही नहीं था।

शाहिद कपूर: पहले ही दिन हमारा एक अहम सीन था और मैंने देखा कि तृप्ति पूरी तरह अपने किरदार में थीं। जब आप किसी एक्टर को इतने कमिटमेंट के साथ काम करते देखते हैं, तो एक अलग तरह की संतुष्टि मिलती है।

सवाल:फिल्म वैलेंटाइन डे पर रिलीज हो रही है। लोग जानना चाहते हैं कि एक हार्डकोर रोमांटिक इंसान की क्या-क्या खूबियां होती हैं। क्या आप खुद को रोमांटिक मानते हैं?

जवाब/शाहिद कपूर: मैं अपने बारे में खुद कमेंट नहीं कर सकता। इसके लिए आपको किसी और से पूछना पड़ेगा। मुझे नहीं पता मैं कितना रोमांटिक हूं। लेकिन हां, रोमांस एक बहुत खूबसूरत चीज है। मोहब्बत जिंदगी की सबसे खूबसूरत चीजों में से एक है, बिना किसी शक के। तो अगर पूछें, तो मैं कहूंगा कि हां, मैं रोमांटिक हूं।

तृप्ति डिमरी: मैं रोमांटिक भी हूं और थोड़ी रियलिस्ट भी। दोनों का बैलेंस जरूरी है।

सवाल: आप दोनों का एक कॉमन कनेक्शन संदीप रेड्डी वांगा भी हैं। फैंस लगातार कहते हैं कि अगर एनिमल पार्क बनी, तो उसमें कबीर सिंह की एंट्री होनी चाहिए। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

जवाब/शाहिद कपूर: पता नहीं यार, शायद मैं इस सवाल का जवाब देने के लिए सही इंसान नहीं हूं। लेकिन सच यह है कि जब एनिमल बन रही थी, तब संदीप मुझसे मिलने आए थे। उनकी इच्छा थी कि कबीर सिंह का एक सीन उस दुनिया में हो। कुछ वजहों से, डेट्स और बाकी चीजों की वजह से, वह हो नहीं पाया। लेकिन उनके दिमाग में यह ख्याल जरूर था।

आगे क्या होगा, यह पूरी तरह संदीप पर है। वह दुनिया उनकी है, किरदार उनके हैं। वह जो सही समझेंगे, वही करेंगे। फैंस चाहते हैं, यह बात अच्छी भी लगती है।

तृप्ति डिमरी: जब दर्शक किसी किरदार को इतने समय तक याद रखते हैं और दोबारा देखना चाहते हैं, तो यह दिखाता है कि वह किरदार उनके दिल में बस चुका है।

सवाल: हाल ही में अरिजीत सिंह ने इंडस्ट्री से ब्रेक लिया। इस पर आपकी क्या राय है?

जवाब/शाहिद कपूर: हर कलाकार की अपनी निजी यात्रा होती है। आर्ट बहुत पर्सनल चीज है। अगर कोई कलाकार अपने लिए थोड़ा सुकून चाहता है, तो वह उसका हक है। अरिजीत ने दुनिया को बहुत सुकून दिया है।

तृप्ति डिमरी: यह फैसले बहुत निजी होते हैं और हमें उन्हें समझदारी के साथ देखना चाहिए।

सवाल: कबीर सिंह आज भी आपके सबसे चर्चित किरदारों में से एक है। एनिमल पार्क में उसकी एंट्री को लेकर जो चर्चा है, उसे आप कैसे देखते हैं?

जवाब/शाहिद कपूर: यह सच है कि जब एनिमल बन रही थी, तब संदीप रेड्डी वांगा मुझसे मिलने आए थे। वह चाहते थे कि कबीर सिंह का एक सीन उस फिल्म की दुनिया में हो। लेकिन कई बार हालात ऐसे बनते हैं कि चीजें चाहकर भी नहीं हो पातीं। कुछ डेट्स का इशू था, कुछ दूसरी वजहें थीं।

यह पूरी तरह डायरेक्टर का फैसला होता है। वह उनकी दुनिया है, उनके किरदार हैं। अगर उन्हें लगेगा कि किसी किरदार की एंट्री कहानी को और मजबूत करती है, तो वह जरूर करेंगे। एक एक्टर के तौर पर यह जानकर अच्छा लगता है कि लोग आज भी उन किरदारों से इतना जुड़ाव महसूस करते हैं।

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